धीरे धीरे से भाग --- 8
ये सब इतनी जल्दी मे हुआ दोनों ही कुछ समझ नहीं पाए अचानक से या सब हुआ तो,,, दीप्ती नर्वस महसूस करने लगी और उसने वीर से थोड़ा गुस्सा होने वाली आँखे दिखाते हुए कहा आगे से यें ना हो तो अच्छा होगा,,,, मुझे अच्छा नहीं लगता किसी का छूना भी कभी भी अगर हाथ लगाया तो अच्छा नहीं होगा में क्या करुँगी मुझे खुद नहीं पता।
ये सब देख कर दीप्ती के मन मे ना जाने फिर से वही सब बाते घूमने लग गयी जो पहले घूमती थी लड़के कभी नहीं बदल सकते कुत्ते की दम है साले, सालो साल भी जमीन मे गाड़ कर रखो पर ज़ब भी निकलेगी टेड़ी ही निकलेगी,,,,,
उसने ये सोच भी कैसे लिए कोई इतना अच्छा भी हो सकता है दिखा दी ना अपनी औकात इसने भी,, अपने करीब करना चाहता था मुझे अगर गलती से उसके करीब आ जाती तो पता नहीं क्या क्या करता छी कितना गन्दा है ये तो ,,,,,
उसकी आवाज़ से दीप्ती अपने वर्त्तमान मे आई,,,
इन्होने कहा अच्छा अब से ऐसा नहीं होगा कभी भी, अब शादी के बाद ही तुम्हारे करीब आउँगा उससे पहले नहीं! मेरा ऐसा वैसा कोई इरादा नहीं था तुम्हे अपने करीब लाने का वो तो तुम भाग रहीं थी इस लिए तुम्हारा हाथ पकड़ का खींच लिया मुझे गलत नहीं समझो प्ल्ज़,
फिर से उसकी बातो ने दीप्ती के मन पर अपना प्रभाव डाला और एक पल मे ही मे उसकी सोच फिर से उसके लिए बदल गयी,,,,
दीप्ती शर्म के चली गई फिर कभी ऐसा नहीं हुआ एक अच्छे दोस्त कि तरह दीप्ती से बात किया करता ।
कुछ ही दिनों मे दीप्ती के ख्याल उसके लिए बदलने लगे थे पर पता नहीं क्यों दीप्ती इस बात को मंजूर ही नहीं कर पा रही थी बार बार उस कर दिल बस ये ही कहता ये इंसान जो दिखता है वो है नहीं और जो ये है वो दिखता नहीं है उसकी आदत उसे पसंद आती थी पर उसमे भी उसे कुछ न कुछ खटक जाता था कभी कभी तो सच्चाई कम झूठ ज्यादा दिखाई देता पर बाते इतनी सफाई से करता की उस पर यकीन अच्छो अच्छो को हो जाता,,,,,
उसे देख कर ऐसा लगता जैसे दीप्ती को भगवान ने देवता दे दिया हो कोई कमी ढूंढने से भी नहीं मिलती थी उसे उसमे,,,,,
प्यार करता हूँ बहुत तुम मेरी जान हो तुम्हारे बिना में एक पल भी सांस क्या जी भी नहीं सकता यें बोला तो नहीं पर इनकी आँखों में साफ साफ दिखाई देता था l
दीप्ती के लिए बेहद फ़िक्र होती, उसे कुछ भी होता तो ज़ब वीर को पता लगते ही उसके पास आ जाता था उसे हर तरह से खुश रखने कि कोशिश करता और बोलता तुम्हे कुछ भी होता है ना तो मेरी जाना निकल जाती है तुम ख्याल क्यों नहीं रखती हो अपना ??
अरे रखती तो हूँ और कैसे रखे दीप्ती ने कहा...।
वीर बोला,,, अच्छा झूठी... अगर रखती तो ऐसा होता क्या बीमार पड़ी हुई हो मुँह निकल आया है इतनी कमजोर हो गई हो खुद कि फ़िक्र नहीं है तो ना सही, कम से कम मेरे लिए ही अपना ख्याल रखा करो मुझे मेरी बीवी मोटी ताजी चाहिए ना कि एक चूसा हुआ आम कि तरह समझी l
दीप्ती ने उसे आँखे बड़ी बड़ी कर के उसे देखती तो वो हंस देता,,,,,,,
वो बोली,,,,बस बस बहुत हो गया कुछ बोल नहीं रही हूँ तो फायदा उठा रहे हो,,,,
तभी तो मजा आता है नहीं तो अब तक खैर नहीं थी मेरी,, घर आ जाओ फिर देखना मै कैसे तुम्हारा ख्याल रखता हूँ l
दीप्ती ने मुँह बनाते हुए कहा,,,,,,hahahaha जाओ जाओ में नहीं आने वाली तुम्हारे साथ ...।
मै दुश्मनों के साथ नहीं रहती,,,,
वीर बोला,,,,अच्छा कौन दुश्मन ...मै!! देखते है कौन रहता है किसके साथ,,,,,
एक दिन वीर ने दीप्ती को बाहर घूमने जाने को बोले पर उसने मना कर दिया,,, नहीं जाना है जो बात करनी है यही करो बाहर क्यों जाना है घर पर किसी ने रोका है क्या आप क़ो, बात करते है ना बाहर नहीं जाना बस,,,,
पता नहीं क्यों दीप्ती को इतना स्पॉट करने के बाद भी उसके दिल के किसी कोने ने उसे उस के साथ जाने की इज़्ज़त ही नहीं दी,,,,ऐसा नहीं था की उसके पापा या मम्मी मना करते,,, पर उसका मन उसके साथ जाने को मना ही नहीं,,,, घर पर उससे आराम से बात कर लेती थी पर बाहर का नाम सुनते ही पता नहीं उसे क्या हो जाता,,,,,
जहा आज की लड़किया लड़को के साथ बाहर घूमने मे अपनी शान समझती थी नये फ़ैशन मे ढली रहती थी जिन का सादगी से दूर दूर तक कर नाता नहीं था वही दीप्ती अपनी मान मर्यादा मे रहती थी सादगी ही उसका गहना था उसके माँ बाप मॉडन थे आज कल के परिवेश के सरूप ही उन्होंने दीप्ती को ढाला था और अपने संस्कार भी उसमे कूट कूट के भरे थे उन्हें आज तक कभी दीप्ती को टोकने की जरुरत नहीं पड़ी थी वो थी ही इतनी समझदार,,,,
वो कुछ भी करने से पहले हजार बार सोचती थी इसलिए ही शायद वो वीर को चाह कर दी वो जगह नहीं दे पा रही थी,,,
दीप्ती को गुस्से मे देखते हुए वीर बोला,,,,, अच्छा अच्छा गुस्सा क्यों होती हो नहीं जाना तो मत जाओ पर प्लीज़ मुझ से गुस्सा ना हो I
वीर का एक अनोखा सा प्यार देख कर दीप्ती कभी कभी खुद पर इतराती थी बहुत अच्छा जीवनसाथी मिला है मुझे अच्छे से समझता है और मै उसे,,,
एक दिन दिन दीप्ती की तबियत अचानक से बिगाड़ गयी उसे हॉस्पिटल मे एडमिट करवाना पड़ा ज़ब दीप्ती के पापा ने वीर के घर फोन कर के उसकी हालत के बारे मे बताया तो वो भी घबरा गयें और सुबह ही भोपाल आ गयें आते ही हॉस्पिटल पहुंच गयें,,,,,,
वीर मेरे पास आए और मेरा हाल पूछा और बोले अचानक से ये सब क्या हो गया,,,,,,
दीप्ती ने उसे कुछ ना बोलते हुए बस मुस्कुरा दी,,,,,
वीर बोला गुस्सा तो मुझे बहुत आ रहा है पर तुम्हारी हालत देख कर कुछ नहीं बोल रहा हूँ तुम्हे तो बाद मे देखूंगा,,,,,,,,
उसने हाँ मे सर हिला दिया और बोली कोई न देख लेना,,,,,,
दो दिन बाद उसकी हॉस्पिटल से छुट्टी हो गयी पर उसे अभी भी आराम नहीं मिला था ज़ब भी उसको दर्द होता तो वो दर्द से चीखे मरती रहती थी उसे बहुत दर्द होता था उससे से अपना पैर भी हिलाया नहीं जाता था,,,,,,,
हुआ ये था की,,,हॉस्पिटल मे उसके पेट मे दर्द हो रहा था दीप्ती ने सिस्टर को बोला तो उसने इंजेक्शन लगा दिया कुलेह पर बस ये ही गजब हो गया घर आई तो पूरा पैर सूज गया उस मे ही उसके पैरों मे दर्द होने लग गया था दर्द इतना था की उससे बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था,,,,,,
वीर ज़ब भी दीप्ती को दर्द से चीखते हुए देखते तो उसका भी कलेजा मुँह को आ जाता था उसकी हलात देखी नहीं जाती थी,,,
दर्द की वजह से उसे बुखार भी बहुत तेज़ होता था बुखार इतना होता था की पापा के पशीने छूट जाते थे इतना बुखार मे इसको कुछ हो ना जाए कभी मम्मी तो कभी पापा तो कभी वीर को बोल देते बेटा तुम इस को ठन्डे पानी की पट्टीया कर दोगे तो वो दीप्ती के सर पर ठन्डे पानी की पट्टीया रखता,,,,
सुबह छत पर मम्मी भेज देती थी बोलती की थोड़ा वॉक कर पैर जमा कर चल नहीं तो पैर ऐसा ही रह जायेगा,,,,,
वीर ज़ब दीप्ती के घर होता तो रोज़ उसे छत पर ले जाता और उसका हाथ पकड़ कर उसे चलवाता बाते करता दीप्ती को हँसता बहुत ख्याल रहता उसका ,,,,,
बीच बीच मे वो अपने घर भी जाता पर मुझे देखने आता रहता दीप्ती के मुश्किल समय मे उसका बहुत ख्याल रख उन दिनों उसने ,,,,,
जारी है
Anjali korde
29-Aug-2023 11:43 AM
Very nice
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Abhilasha Deshpande
28-Aug-2023 10:16 AM
Very nice
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पृथ्वी सिंह बेनीवाल
24-Jul-2023 08:47 PM
👏👍🏼
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